राधापति गति एक तुम मोकौं और न ठाउँ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (107)

राधापति गति एक तुम मोकौं और न ठाउँ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (107)

राधापति गति एक तुम, मोकौं और न ठाउँ।
‘वृन्दावन हित’ रावरी, टहल देहु बलि जाउँ॥

- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (107)

हे राधा पति (श्रीकृष्ण)! आप ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं । आपके अतिरिक्त मेरे लिए दूसरी कोई ठौर नहीं है। श्रीहित वृंदावन दास कहते हैं: “मैं बार बार बलिहारी जाऊँ, कृपया मुझे अपने श्रीवृंदावनधाम की निकुंज सेवा का सौभाग्य प्रदान करें।”