आय सकत नहिं गिरा में संप्रदाय मम रीत - श्री चरण दास

आय सकत नहिं गिरा में संप्रदाय मम रीत - श्री चरण दास

आय सकत नहिं गिरा में, संप्रदाय मम रीत ।
प्रेम संप्रदाय नाम है, कथ्यो कछुक लखि प्रीत ॥

- श्री चरण दास

मेरे संप्रदाय की रीति का पूर्ण वर्णन वाणी से कर पाना संभव नहीं। इसे प्रेम-सम्प्रदाय कहते हैं, इसकी कुछ अनुभूति और अभिव्यक्ति भी केवल प्रेम के माध्यम से ही संभव है।