ज्ञान करम रु उपासना सब अहमिति को मूल - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (12)

ज्ञान करम रु उपासना सब अहमिति को मूल - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (12)

ज्ञान करम रु उपासना, सब अहमिति को मूल। 
दृढ़ निस्चय नहिं होत बिन, किए प्रेम अनुकूल॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (12)

ज्ञान, कर्म-काण्ड, उपासना आदि यह सब मन में अहंकार उत्पन्न करते हैं। जब तक मनुष्य अपने को पूर्णतः प्रेममार्ग में नहीं समर्पित करता, उसके अनुकूल नहीं बनाता, तब तक भगवान में अटूट श्रद्धा उत्पन्न नहीं होती।