(कवित्त)
वृन्दावन-वृक्ष हैं कि पारिजात नन्दन के,
वृन्दावन-शाखा या प्रेमाञ्जन-शलाका हैं। [1]
वृन्दावन-रज या रजत रेणु-राज रही,
वृन्दावन पथ हैं कि प्रेम-पुरी-नाका हैं ॥ [2]
वृन्दावन-कुञ्ज या इन्द्र-भवन शोभित हैं,
वृन्दावन-धाम या निकेतन प्रभा का है। [3]
वृन्दावन-फूल हैं कि तारावलि उतारी ये,
वृन्दावन-पात हैं कि प्रेम की पताका हैं ॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (6)
क्या ये वृंदावन के साधारण वृक्ष हैं, या स्वयं स्वर्ग के पारिजात वृक्ष हैं?
क्या ये वृंदावन की शाखाएँ हैं, या किसी दिव्य प्रेम के अंजन से अभिषिक्त दिव्य शलाकाएँ? [1]
क्या ये वृंदावन की रज के कण हैं, या शुद्ध रजत (चाँदी) के उज्ज्वल मोती?
क्या ये पथ हैं, या स्वयं प्रेमलोक के द्वार? [2]
क्या ये वृंदावन के कुंज हैं, या स्वर्गीय इंद्र लोक से भी अधिक दिव्यता से युक्त वासस्थल?
क्या यह भूमि केवल वृंदावन है, या साक्षात् सौंदर्य की मूर्तिमान अभिव्यक्ति? [3]
क्या ये पुष्प हैं, या ब्रह्मांड से झरती तारों की सुगंधित मालाएँ?
क्या ये पत्तियाँ हैं, या प्रेम की ध्वजाएँ जो पवन में मधुर स्वर में फहर रही हैं? [4]
वृन्दावन-वृक्ष हैं कि पारिजात नन्दन के,
वृन्दावन-शाखा या प्रेमाञ्जन-शलाका हैं। [1]
वृन्दावन-रज या रजत रेणु-राज रही,
वृन्दावन पथ हैं कि प्रेम-पुरी-नाका हैं ॥ [2]
वृन्दावन-कुञ्ज या इन्द्र-भवन शोभित हैं,
वृन्दावन-धाम या निकेतन प्रभा का है। [3]
वृन्दावन-फूल हैं कि तारावलि उतारी ये,
वृन्दावन-पात हैं कि प्रेम की पताका हैं ॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (6)
क्या ये वृंदावन के साधारण वृक्ष हैं, या स्वयं स्वर्ग के पारिजात वृक्ष हैं?
क्या ये वृंदावन की शाखाएँ हैं, या किसी दिव्य प्रेम के अंजन से अभिषिक्त दिव्य शलाकाएँ? [1]
क्या ये वृंदावन की रज के कण हैं, या शुद्ध रजत (चाँदी) के उज्ज्वल मोती?
क्या ये पथ हैं, या स्वयं प्रेमलोक के द्वार? [2]
क्या ये वृंदावन के कुंज हैं, या स्वर्गीय इंद्र लोक से भी अधिक दिव्यता से युक्त वासस्थल?
क्या यह भूमि केवल वृंदावन है, या साक्षात् सौंदर्य की मूर्तिमान अभिव्यक्ति? [3]
क्या ये पुष्प हैं, या ब्रह्मांड से झरती तारों की सुगंधित मालाएँ?
क्या ये पत्तियाँ हैं, या प्रेम की ध्वजाएँ जो पवन में मधुर स्वर में फहर रही हैं? [4]

