उत्तम करे सो लाड़िली - श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (107)

उत्तम करे सो लाड़िली - श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (107)

उत्तम करै सो लाड़िली, मध्यम हम सौं होइ।
इही बात निस्चै करि, हरि के प्यारे सोई॥

- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (107)

श्रीराधा जो कुछ करती हैं, वह सदा परम उत्तम और कल्याणकारी होता है; जबकि हम सीमित बुद्धि वाले जीव केवल मध्यम या स्वार्थयुक्त कर्म ही कर पाते हैं। जो साधक हर परिस्थिति में यह भली भाँति जानकर पूर्ण समर्पण भाव से श्री राधा की इच्छा को ही अपनी इच्छा बना लेता है, वही श्रीहरि का सच्चा प्रियपात्र बनता है।