मम विनय करुणा धाम श्यामा श्याम यह सुनि लीजियै।
नित बास वृंदाविपिन मे दृढ़ संग रसिकन दीजियै॥ [1]
बंशी अली हरिदास हित हरिवंश व्यासादिक जहां।
तहं तुम्हें विहरत देखि अलिसंकेत सुख पावै महां॥ [2]
- श्री संकेत अली, संकेत लता (888)
हे करुणा के धाम श्री श्यामा-श्याम! मेरी यह विनती सुनिए — मुझे नित्य श्रीवृंदावन का वास एवं अनन्य रसिकों का संग प्रदान कीजिए। [1]
श्री संकेत अली जी कहते हैं — “जहाँ श्री वंशीअली जी, श्री हरिदास जी, श्री हित हरिवंश जी, श्री हरिराम व्यास जी आदि अनन्य रसिक वास करते हैं, वहीं तुम दोनों को मैं भी नित्य विहार करते हुए निहारूँ — यही मेरे जीवन का परम सुख है।” [2]

