श्री वृंदावन के दरस ते, भये जीव अनुकूल।
भवसागर अथाह जल, उतरन को यह तूल॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (71)
श्री वृंदावन का दर्शन जीव के लिए भगवत्प्राप्ति के मार्ग में अत्यंत अनुकूल और सहायक होता है। यह संसार एक अथाह समुद्र के समान है, जिसे पार करने का श्रेष्ठ साधन श्री वृंदावन ही है।

