सोइ पूत सपूत है जो भक्ति करे चित लाय - श्री मलूक दास

सोइ पूत सपूत है जो भक्ति करे चित लाय - श्री मलूक दास

सोइ पूत सपूत है, जो भक्ति करे चित लाय।
जरा मरन तें छूटि परै, अजर अमर होइ जाय॥
- श्री मलूक दास

केवल वही पुत्र वास्तव में धन्य है जो अपने मन को पूर्ण रूप से भक्ति में लगाता है। ऐसी भक्ति के माध्यम से वह जरा और मृत्यु से पार होकर, शाश्वत और अमर अवस्था को प्राप्त करता है।