श्यामा अब तो रह्यौ न जाय - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (50)

श्यामा अब तो रह्यौ न जाय - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (50)

(राग पीलू त्रिताल)
श्यामा अब तो रह्यौ न जाय।
पल-पल याद सताये तिहारी, सेवाकुञ्ज मन भाय॥ [1]
वृन्दाविपिन निकुञ्जन मांही, चरणन रज मिल जाय।
श्रीगोपालहित प्राण जीवनी, भूले नहीं भुलाय॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (50)

हे श्यामा (राधा), अब मैं आपके बिना एक पल भी नहीं रह सकता। आपकी याद मुझे हर क्षण सताती रहती है एवं आपकी नित्य स्थली सेवाकुंज मेरे हृदय को अत्यंत मनोहर लगती है। [1]

मेरी बस यही आशा है कि वृंदावन के निकुंज में मुझे वास दीजिए, और आपके चरणों की रज मुझे प्राप्त हो जाए। हे श्री हित गोपाल दास जी की प्राण जीवनी!  आपकी कृपा एवं स्मृति भुलाने से भी नहीं भूली जा सकती। [2]