पूर्णब्रह्मसुखैश्वर्यं नित्यमानंदमव्ययम्।
वैकुंठादि तदंशांशं स्वयं वृंदावनं भुवि॥
- पद्मपुराण, पातालखण्ड(5.69.9)
पृथ्वी पर स्थित वृंदावन पूर्ण ब्रह्म का साकार रूप है जो परम सुख, ऐश्वर्य एवं नित्यानंद से परिपूर्ण है। वैकुंठ आदि लोक तो इसके केवल अंश मात्र हैं।

