किं करोमि क्क गच्छामि - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (43)

किं करोमि क्क गच्छामि - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (43)

किं करोमि क्क गच्छामि कस्य पादे लुठाम्यहम्‌।
कथं वा लभते राधे तव दास्य रसोत्सवम्‌॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (43)

हे राधे ! मैं क्या करूँ? कहाँ जाऊँ? और किसके चरणों में लुण्ठित होऊँ ? तुम्हीं कहो तुम्हारा वह दास्य-रसोत्सव मुझे किस प्रकार प्राप्त होगा ?