मोरकुटी और दान मान गढ़, गढ़ विलास सुख पइये।
गहवर वन की बैठ लतन में, श्रीराधा - राधा कहिये॥ [1]
सदा-सर्वदा पर्वत ऊपर, नित-प्रति चढ़कर जइये।
लाड़िलीलाल के दर्शन पाकर, तन-मन-नयन सिरैये॥
कहे दास बास बरसानो, बड़े भाग्य तें पइये॥ [2]
- रसिक वाणी
- रसिक वाणी
बरसाना के दिव्य स्थानों जैसे मोरकुटी, दानगढ़, मानगढ़ और विलासगढ़ आदि में प्रेमपूर्वक विचरण कर, परमानंद को प्राप्त करना चाहिए। गह्वर वन की लताओं की मधुर छाया में बैठकर “श्री राधा राधा” जपना चाहिए। [1]
प्रतिदिन ब्रह्माचल पर्वत पर चढ़कर श्री लाड़लीलाल के दर्शन को पाकर अपने तन, मन एवं नेत्रों को पावन और तृप्त करना चाहिए। बरसाना धाम में वास करना, परम दुर्लभ सौभाग्य से ही प्राप्त होता है। [2]

