तनक सोहागो डारिकें जड़ कंचन पिघलाय - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर

तनक सोहागो डारिकें जड़ कंचन पिघलाय - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर

तनक सोहागो डारिकें, जड़ कंचन पिघलाय।
सदा सुहागिनी राधिका, क्यों न कृष्ण ललचाय॥

- श्री परमानन्द दास जी

जिस प्रकार सोने (सुवर्ण) पर तनिक सा सुहागा डालने पर जड़ सुवर्ण भी पिघल जाता है, तब श्री राधा तो सदा सुहागिन हैं, उनके स्वरूप को देखकर श्री कृष्ण का पिघलना (ललचाना) तो स्वाभाविक ही है।