भजो कीरति नन्दिनी श्रीश्यामा।
भानुबबा की अति ही लाड़िली, लाड़-लड़ावै भैया श्रीदामा ॥ [1]
ललिता विशाखा की प्राण जीवनधन, मोहन गावै याकौ गुनग्रामा।
'बंशीअलि' की आश किशोरी, बरसानो याकौ निज धामा॥ [2]
- श्री वंशी अलि
कीर्ति नंदिनी श्री राधा का अनन्य भजन करो। वे वृषभानु बाबा की अति ही लाड़िली पुत्री हैं एवं जिनके भैया श्रीदामा ने उन्हें लाड़ लड़ाया है। [1]
वह ललिता और विशाखा आदि सखियों का प्राण जीवन-धन हैं, भगवान श्रीकृष्ण सदा उनके गुणों का गान करते रहते हैं। श्री वंशी अली कहते हैं, “श्री राधा ही मेरी एकमात्र आस हैं, जिनका निज धाम श्री बरसाना धाम है।” [2]
भानुबबा की अति ही लाड़िली, लाड़-लड़ावै भैया श्रीदामा ॥ [1]
ललिता विशाखा की प्राण जीवनधन, मोहन गावै याकौ गुनग्रामा।
'बंशीअलि' की आश किशोरी, बरसानो याकौ निज धामा॥ [2]
- श्री वंशी अलि
कीर्ति नंदिनी श्री राधा का अनन्य भजन करो। वे वृषभानु बाबा की अति ही लाड़िली पुत्री हैं एवं जिनके भैया श्रीदामा ने उन्हें लाड़ लड़ाया है। [1]
वह ललिता और विशाखा आदि सखियों का प्राण जीवन-धन हैं, भगवान श्रीकृष्ण सदा उनके गुणों का गान करते रहते हैं। श्री वंशी अली कहते हैं, “श्री राधा ही मेरी एकमात्र आस हैं, जिनका निज धाम श्री बरसाना धाम है।” [2]

