(सवैया)
श्रीवृषभानु से राजा जहाँ अरु, कीरति सी महिषी सुख दानी। [1]
श्रीवृषभानु पुर हूँ कहैं, बरसाने सी राजति हैं रजधानी ॥ [2]
मंदिर मंजुल मध्य बिराजति, भ्राजति उच्च ध्वजा फैरानी। [3]
प्राणन प्यारी श्याम सुजान की, सेब्य हमारी श्रीराधिका रानी॥ [4]
- ब्रज के सवैया
जहाँ स्वयं श्री वृषभानु जी जैसे राजा हैं और जहाँ कीरति जैसी सुखदायिनी रानी हैं । [1]
जिसे श्री वृषभानुपुर (वृषभानु जी का नगर) कहा जाता है, जिसकी बरसाना जैसी राजधानी शोभायमान है। [2]
उस नगर के मध्य में ऊँचाई पर एक सुंदर मंदिर विराजमान है जिसकी ध्वजा चमकती और लहराती हुई शोभा पा रही है। [3]
जो श्री श्यामसुंदर के प्राणों से भी अधिक प्यारी हैं, वही श्री राधिका रानी हमारी आराध्या एवं सेव्या हैं। [4]
श्रीवृषभानु से राजा जहाँ अरु, कीरति सी महिषी सुख दानी। [1]
श्रीवृषभानु पुर हूँ कहैं, बरसाने सी राजति हैं रजधानी ॥ [2]
मंदिर मंजुल मध्य बिराजति, भ्राजति उच्च ध्वजा फैरानी। [3]
प्राणन प्यारी श्याम सुजान की, सेब्य हमारी श्रीराधिका रानी॥ [4]
- ब्रज के सवैया
जहाँ स्वयं श्री वृषभानु जी जैसे राजा हैं और जहाँ कीरति जैसी सुखदायिनी रानी हैं । [1]
जिसे श्री वृषभानुपुर (वृषभानु जी का नगर) कहा जाता है, जिसकी बरसाना जैसी राजधानी शोभायमान है। [2]
उस नगर के मध्य में ऊँचाई पर एक सुंदर मंदिर विराजमान है जिसकी ध्वजा चमकती और लहराती हुई शोभा पा रही है। [3]
जो श्री श्यामसुंदर के प्राणों से भी अधिक प्यारी हैं, वही श्री राधिका रानी हमारी आराध्या एवं सेव्या हैं। [4]

