धन धन वृन्दाविपिन भई पनिहारी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (59)

धन धन वृन्दाविपिन भई पनिहारी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (59)

धन धन वृन्दाविपिन भई पनिहारी ।
प्रात होय जमुना जल न्हावै, सब ही गोप कुमारी॥ [1]
बातें करैं धरैं सिर गागर, चाल चलैं मतवारी।
अभयराम ऐ तो बड़भागिन, स्याम सुन्दर की प्यारी॥ [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (59)

धन्य धन्य हैं वृन्दावन की पनिहारियाँ। प्रातःकाल यमुना में स्नान करने सभी गोप-कन्याएँ आती हैं। [1]

वे आपस में बातें करती हूँ, सिर पर घड़ा रखकर मतवाली चाल में चलती हैं। अभयराम कहते हैं क ये गोपियाँ बहुत ही भाग्यशालिनी हैं, क्योंकि वे श्री श्यामसुंदर की अत्यंत प्यारी हैं। [2]