डोल झूलिये दोऊ प्यारे।
कुंजमहल में फूलनि-रचना, फूलनि फूल सँवारे॥ [1]
फूलनि के अम्बर आभूषन, फूलनि सौं उर धारे।
श्रीहित गुलाब फूले “परमानँद”, जुगल-फूल-छबि वारे॥ [2]
- श्री हित परमानंद दास जी
दोनों प्यारे (प्रिया-प्रियतम) कुंजमहल में फूलों से सजे हुए झूले पर झूल रहे हैं। कुंजमहल में फूलों की सुंदर सजावट की गई है, खिले हुए फूलों से ही हर कोना सँवारा गया है। [1]
दोनों ने फूलों के बने वस्त्र और आभूषण धारण किए हैं। उन्होंने अपने वक्षस्थल पर भी फूलों से अलंकरण किया है। श्रीहित परमानंद जी कहते हैं कि वे भी प्रफुल्लित होकर उन फूलों से सुसज्जित युगल स्वरूप को निहार, कर स्वयं को बलिहार कर रहे हैं। [2]
कुंजमहल में फूलनि-रचना, फूलनि फूल सँवारे॥ [1]
फूलनि के अम्बर आभूषन, फूलनि सौं उर धारे।
श्रीहित गुलाब फूले “परमानँद”, जुगल-फूल-छबि वारे॥ [2]
- श्री हित परमानंद दास जी
दोनों प्यारे (प्रिया-प्रियतम) कुंजमहल में फूलों से सजे हुए झूले पर झूल रहे हैं। कुंजमहल में फूलों की सुंदर सजावट की गई है, खिले हुए फूलों से ही हर कोना सँवारा गया है। [1]
दोनों ने फूलों के बने वस्त्र और आभूषण धारण किए हैं। उन्होंने अपने वक्षस्थल पर भी फूलों से अलंकरण किया है। श्रीहित परमानंद जी कहते हैं कि वे भी प्रफुल्लित होकर उन फूलों से सुसज्जित युगल स्वरूप को निहार, कर स्वयं को बलिहार कर रहे हैं। [2]

