रादाने धारणे धा च इति धातुद्वयादपि - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (10)

रादाने धारणे धा च इति धातुद्वयादपि - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (10)

रादाने धारणे धा च इति धातुद्वयादपि।
राधानाम्नोऽस्ति निष्पत्तिर्विज्ञेया भक्तसत्तमै:॥

- श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (10)

‘रा’ दानार्थक (दान करने की धातु) और ‘धा’ धारणार्थक (धारण करने अथवा रक्षा करने की धातु)—इन दोनों धातुओं से ‘राधा’ नाम की उत्पत्ति मानी जाती है। यह तथ्य भक्तों में श्रेष्ठ जनों को अवश्य जानना चाहिए।