आजु बनी अति सारंग नैनी - श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

आजु बनी अति सारंग नैनी - श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

(राग ईमन )
आजु बनी अति सारंग नैनी।
मदनमोहन पिय रचि पचि कर, गूथि बनाई बेनी॥ [1]
मृग मद तिलक, लिखत भाल सकल, कलागुननिधान रूप की एनी।
'गोविंद' प्रभु रस बस कीने सोहाग तें मदनमोहन सुख देनी॥ [2]

- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (461)

सारंग के समान नेत्रों वाली श्रीराधा आज अत्यंत सुंदर बनी हैं। कामदेव को भी मोहित करने वाले श्रीकृष्ण भी राधा के सौंदर्य में पूर्णतः रच-पचकर, उनके बालों की वेणी सजाने में लगे हैं। [1]

श्रीकृष्ण श्रीराधा के माथे पर मृगमद (कस्तूरी) से प्रेमपूर्वक तिलक की रचना कर रहे हैं। श्रीराधा समस्त रूप, कला और गुणों की साक्षात मूर्ति हैं। श्री गोविंददास कहते हैं कि श्रीराधा ने श्रीकृष्ण को अपने रस के वशीभूत कर लिया है एवं ऐसे प्रेममय मिलन से श्रीराधा ने श्रीकृष्ण को परम सुख प्रदान कर दिया है। [2]