जुगल बिहारी विरह में - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (98)

जुगल बिहारी विरह में - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (98)

जुगल बिहारी विरह में, नाहिंन अब अवकास ।
ललितकिशोरी दीजिये, श्रीवृन्दाबन वास॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (98)

युगल विहार करने वाले श्री राधा-कृष्ण का वियोग अब और सहन नहीं होता। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि हे किशोरीजी! कृपा कर अब मुझे वृन्दावन का वास प्रदान कीजिए ।