श्री यमुनाजी सो नेह करि, यह नेमी तू लेह ।
श्री वल्लभ के दास बिनु, औरन सो तजि स्नेह॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (76)
यदि जीवन में कोई नियम अपनाना है, तो बस इतना कर — यमुना जी से अटूट प्रेम कर, और श्रीकृष्ण के दासों (भगवद्प्राप्त संतों) को छोड़ अन्य किसी से स्नेह न कर।
श्री वल्लभ के दास बिनु, औरन सो तजि स्नेह॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (76)
यदि जीवन में कोई नियम अपनाना है, तो बस इतना कर — यमुना जी से अटूट प्रेम कर, और श्रीकृष्ण के दासों (भगवद्प्राप्त संतों) को छोड़ अन्य किसी से स्नेह न कर।

