जिनके श्रीहरिवंश सहायक ।
तेई सजन भजन अधिकारी
वृन्दावन घन बसिवे लायक ॥ [1]
अलक लड़े आनन्द भरे डोलें
सिर पर व्याससुवन सुखदायक।
कुंवरि कुंवर जाहि सुलभ नागरिदास
रसिक शिरोमनि के गुनगायक ॥ [2]
- श्री नेह नागरी दास, श्री नेह नागरी दास जी की वाणी
जिनके श्री हरिवंश महाप्रभु सहायक हैं, वे ही सज्जन वृंदावन रस-भजन के अधिकारी हैं और सघन श्री वृंदावन में बसने के योग्य हैं। [1]
जहाँ अलक लड़े श्री राधा वल्लभ लाल आनंद में भरे हुए डोलते हैं तथा उन भजन अधिकारियों के सिर पर सुखदायक श्री हरिवंश महाप्रभु विराजते हैं, अर्थात् उनकी रक्षा करते हैं। ऐसे अधिकारी जन के लिए प्रिया-प्रियतम अत्यंत सुलभ हैं क्योंकि वे सदा रसिक शिरोमणि हरिवंश महाप्रभु की शरण लेकर उनका गुणगान करते हैं। [2]
तेई सजन भजन अधिकारी
वृन्दावन घन बसिवे लायक ॥ [1]
अलक लड़े आनन्द भरे डोलें
सिर पर व्याससुवन सुखदायक।
कुंवरि कुंवर जाहि सुलभ नागरिदास
रसिक शिरोमनि के गुनगायक ॥ [2]
- श्री नेह नागरी दास, श्री नेह नागरी दास जी की वाणी
जिनके श्री हरिवंश महाप्रभु सहायक हैं, वे ही सज्जन वृंदावन रस-भजन के अधिकारी हैं और सघन श्री वृंदावन में बसने के योग्य हैं। [1]
जहाँ अलक लड़े श्री राधा वल्लभ लाल आनंद में भरे हुए डोलते हैं तथा उन भजन अधिकारियों के सिर पर सुखदायक श्री हरिवंश महाप्रभु विराजते हैं, अर्थात् उनकी रक्षा करते हैं। ऐसे अधिकारी जन के लिए प्रिया-प्रियतम अत्यंत सुलभ हैं क्योंकि वे सदा रसिक शिरोमणि हरिवंश महाप्रभु की शरण लेकर उनका गुणगान करते हैं। [2]

