जाकौ गति चाहत दियौ लेत अगति तैं राखि- श्री रसनिधि

जाकौ गति चाहत दियौ लेत अगति तैं राखि- श्री रसनिधि

जाकौ गति चाहत दियौ, लेत अगति तैं राखि ।
रसनिधि हैं या बात के, भक्त भागवत साखि ॥

- श्री रसनिधि

जिसको स्वयं भगवान गति देना चाहते हैं, भले ही वह कैसा भी हो, वे उसे हर प्रकार की बुरी दशा से बचा कर सम्भाल लेते हैं । श्री रसनिधि कहते हैं कि इस बात के सभी भगवान के भक्त एवं भागवत आदि पुराण ग्रंथ गवाह हैं ।