मेरी स्वामिनि ललित किसोरी - श्री किशोरी अलि

मेरी स्वामिनि ललित किसोरी - श्री किशोरी अलि

(राग मलार)
मेरी स्वामिनि ललित किसोरी ।
प्रीतम-संग कुंज के आँगन, बिहरत बॉहनि जोरी ॥ [1]
हिय हरखत निरखत बन-सोभा, पावस रितु पिय-गोरी ।
अद्भुत छबि दंपत्ति-संपति की, लखि अलिगन तृन तोरी ॥ [2]

- श्री किशोरी अलि

मेरी स्वामिनी, ललित छवि वाली श्री राधा हैं जो अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के साथ वृंदावन के कुंजों में बाँह में बाँह डालकर विहार करती हैं । [1]

वर्षा ऋतु की छटा और वन की मधुरता को देखकर, सांवल गोरी जोड़ी का हृदय हर्षित है। युगल दंपत्ति की अनुपम छवि को देखकर सखियाँ स्वयं को बलिहार कर रही हैं । [2]