व्यासहि बॉमन जिनि गनौं, हरिभक्तन कौ दास।
(श्री) राधावल्लभ कारनैं, सह्यौ जगत उपहास ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (14)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं “मुझे ब्राह्मण मत गिनो, मैं तो हरिभक्तों का दास हूँ”। श्रीराधावल्लभ लाल जी के प्रेम में, संसार के समस्त ताने और उपहास को मैंने विभोर होकर ग्रहण किया है ।
(श्री) राधावल्लभ कारनैं, सह्यौ जगत उपहास ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (14)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं “मुझे ब्राह्मण मत गिनो, मैं तो हरिभक्तों का दास हूँ”। श्रीराधावल्लभ लाल जी के प्रेम में, संसार के समस्त ताने और उपहास को मैंने विभोर होकर ग्रहण किया है ।

