क्षीर सारमपहृत्य शंकया स्वीकृतं यदि पलायनं त्वया ।
मानसे मम नितान्ततामसे नन्दनन्दन कथं न लीयसे ॥
- श्रीकृष्ण सूक्ति
हे श्री कृष्ण! माखन चुराकर यदि आप भय से भागना ही चाहते हैं तो आप अत्यन्त अंधकारपूर्ण मेरे मन में आकर क्यों नहीं छिप बैठते? यहाँ इतना अंधकार है कि कोई आपको कभी खोजने भी निकले तो ढूँढे न सकेगा।
मानसे मम नितान्ततामसे नन्दनन्दन कथं न लीयसे ॥
- श्रीकृष्ण सूक्ति
हे श्री कृष्ण! माखन चुराकर यदि आप भय से भागना ही चाहते हैं तो आप अत्यन्त अंधकारपूर्ण मेरे मन में आकर क्यों नहीं छिप बैठते? यहाँ इतना अंधकार है कि कोई आपको कभी खोजने भी निकले तो ढूँढे न सकेगा।

