वेद, पुरान, सुमृति सबैं, सुर-नर सेबत जाहि।
महा मूढ़ अज्ञान मति, क्यौं न सँभारत ताहि॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
सभी वेद, पुराण और स्मृतियाँ उसी प्रभु की महिमा का बखान करते हैं, जिसकी सेवा सभी सुर-नर-मुनि आदि करते हैं। अरे महामूर्ख मन! तू उस परम प्रभु का स्मरण क्यों नहीं करता?
महा मूढ़ अज्ञान मति, क्यौं न सँभारत ताहि॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
सभी वेद, पुराण और स्मृतियाँ उसी प्रभु की महिमा का बखान करते हैं, जिसकी सेवा सभी सुर-नर-मुनि आदि करते हैं। अरे महामूर्ख मन! तू उस परम प्रभु का स्मरण क्यों नहीं करता?

