प्रेम दिवाने जो भये, प्रीतम के रँग माहिं।
सहजो सुधि बुधि सब गई, तन की सोधी नाहिं॥
- श्री सहजो बाई
परम प्रियतम भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में रंगा हुआ जीव संसार, शरीर और परमार्थ की स्मृति से परे हो जाता है। उसे न जग की परवाह रहती है, न वैकुंठ/मुक्ति आदि की चाह। उसे अपने शरीर तक की भी सुध नहीं रहती ।
सहजो सुधि बुधि सब गई, तन की सोधी नाहिं॥
- श्री सहजो बाई
परम प्रियतम भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में रंगा हुआ जीव संसार, शरीर और परमार्थ की स्मृति से परे हो जाता है। उसे न जग की परवाह रहती है, न वैकुंठ/मुक्ति आदि की चाह। उसे अपने शरीर तक की भी सुध नहीं रहती ।

