अन्य देव पूजा तजै भजै युगल दृढ़ हेत- श्री प्रियादास जी, अनन्य मोदिनी (14)

अन्य देव पूजा तजै भजै युगल दृढ़ हेत- श्री प्रियादास जी, अनन्य मोदिनी (14)

अन्य देव पूजा तजै, भजै युगल दृढ़ हेत ।
भक्ति बढ़े जुन लावके, करतल हलहत खेत ॥

- श्री प्रियादास जी, अनन्य मोदिनी (14)

जो साधक अन्य देवतायों की पूजा को त्याग कर, दृढ़ भाव से श्री राधा-कृष्ण (युगल) का ही अनन्य भजन करता है, उसकी भक्ति उसी प्रकार फलती-फूलती है जैसे कोई किसान खेत में हल चलाकर बीज बोता है और उसे अपनी हथेलियों से सँवारता है, धीरे-धीरे वह खेत हरा-भरा हो जाता है।