श्रीराधे रानी दे डारो बंशी मोरी ।
जा बंसी में मेरी प्राण बसत है, सो बंसी गई चोरी ॥ [1]
काहे से गाऊँ प्यारी काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गईयाँ फेरी ।
मुख से गावो कान्हा हाथों से बजाओ, लकुटी से लाओ गईयाँ घेरी ॥ [2]
हा हा करत तेरे पैयाँ परत हूँ, तरस खाओ प्यारी मोरी ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, बंसी लेकर छोरी ॥ [3]
- श्री मीराबाई
हे राधे रानी! मेरी बाँसुरी मुझे दे दो। जिस बाँसुरी में मेरी जान है वही बाँसुरी चोरी हो गई है । [1]
अब मैं किससे गाऊँ, किससे बजाऊँ और गायों को कैसे वापस बुलाऊँ? श्री राधा कहती हैं कि हे प्यारे, अपने मुख से गाओ, अपने हाथ से ताली बजाओ, एवं लकुटिया से गैया को घेर कर लाओ। [2]
मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ। तुम्हारे पाँव पड़ता हूँ। मेरी प्यारी मुझ पर तरस खाओ। मीरा के प्रभु गिरधर नागर ने श्री राधा से बंसी वापस ले कर ही छोड़ी। [3]
जा बंसी में मेरी प्राण बसत है, सो बंसी गई चोरी ॥ [1]
काहे से गाऊँ प्यारी काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गईयाँ फेरी ।
मुख से गावो कान्हा हाथों से बजाओ, लकुटी से लाओ गईयाँ घेरी ॥ [2]
हा हा करत तेरे पैयाँ परत हूँ, तरस खाओ प्यारी मोरी ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, बंसी लेकर छोरी ॥ [3]
- श्री मीराबाई
हे राधे रानी! मेरी बाँसुरी मुझे दे दो। जिस बाँसुरी में मेरी जान है वही बाँसुरी चोरी हो गई है । [1]
अब मैं किससे गाऊँ, किससे बजाऊँ और गायों को कैसे वापस बुलाऊँ? श्री राधा कहती हैं कि हे प्यारे, अपने मुख से गाओ, अपने हाथ से ताली बजाओ, एवं लकुटिया से गैया को घेर कर लाओ। [2]
मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ। तुम्हारे पाँव पड़ता हूँ। मेरी प्यारी मुझ पर तरस खाओ। मीरा के प्रभु गिरधर नागर ने श्री राधा से बंसी वापस ले कर ही छोड़ी। [3]

