रसना रस की खानि तू, सरस मधुर प्रिय तोय ।
तौ पी राधा प्रेम रस, या सम मधुर न कोय ॥
- ब्रज के दोहे
हे जिह्वा! तू तो रसों की ख़ान है, तुझे सदा सरस-मधुर विषयों में ही आनंद आता है — तो क्यों न तू “श्रीराधा” नाम रूपी प्रेमरस को नित्य पिया कर क्योंकि इसके समान मधुरता कहीं और नहीं है।
तौ पी राधा प्रेम रस, या सम मधुर न कोय ॥
- ब्रज के दोहे
हे जिह्वा! तू तो रसों की ख़ान है, तुझे सदा सरस-मधुर विषयों में ही आनंद आता है — तो क्यों न तू “श्रीराधा” नाम रूपी प्रेमरस को नित्य पिया कर क्योंकि इसके समान मधुरता कहीं और नहीं है।

