नख-सिख मोहनि सोहनी, बारी रति श्री कोटि।
जद्दपि पिय मोहन हुते, रहे चरन तर लोटि॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, रंग हुलास (19)
नित्य-नवेली श्री राधा नख-शिख पर्यन्त परम सुहावनी एवं मनमोहनी हैं। उन पर कोटि-कोटि रति एवं साक्षात् महालक्ष्मी भी न्यौछावर हैं। यद्यपि प्रियतम श्याम-सुन्दर स्वयं मोहन हैं (मोहित करने वाले) हैं, तथापि श्री राधा के रूप-सौन्दर्य पर मुग्ध हुए उनके चरण-तल में विलुण्ठित होते रहते हैं।

