कंचन की यह भूमि है - श्री चरणदास, भक्ति सागर

कंचन की यह भूमि है - श्री चरणदास, भक्ति सागर

कंचन की यह भूमि है, धरे सतोगुण बेख।
चरणदास बलि बलि गयौ, दिव्यदृष्टि करदेख॥
- श्री चरणदास, भक्ति सागर

श्रीधाम वृंदावन की यह भूमि स्वर्ण जैसी है, जिसने सतोगुण रूपी आभूषण धारण कर रखा है। श्री चरणदास बार बार बलिहारी जा रहे हैं, जिसे केवल दिव्य दृष्टि से ही निहारा जा सकता है।