जै जै श्री घनश्याम वपु, जै श्री राधा वाम।
जै जै सब ब्रज-सुंदरी, जै जै वृंदावन धाम॥
जै जै सब ब्रज-सुंदरी, जै जै वृंदावन धाम॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, वेणु गीत (1)
जय हो उन श्यामसुंदर की, जिनका वपु घनश्याम मेघ के समान मोहक है। जय हो उन राधा की, जो सदैव उनके वाम भाग में अद्भुत माधुरी के साथ विराजती हैं। ब्रज भूमि की समस्त सखियों की जय हो, श्रीवृंदावन धाम की जय हो।

