राधे अलबेली सरकार - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (115)

राधे अलबेली सरकार - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (115)

(राग भुपाली, त्रिताल)
राधे अलबेली सरकार।
वनरानी रसिकन की प्यारी, अति उदार सुकमार॥ [1]
जाके पग नूपुर रव सों ही, कोटि ब्रह्म अवतार।
रास विहारिन कुञ्ज विहारिण, महिमा अमित अपार॥ [2]
नव-निकुञ्ज की नव निधि राधे, करती नित्त बिहार।
श्रीगोपालहित नवल प्रिया पै, बार-बार बलिहार॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (115)

श्री राधारानी अलबेली सरकार हैं — वे सम्पूर्ण वृन्दावन की अधिष्ठात्री महारानी हैं, रसिकों की जीवन-प्राण हैं, परम उदार एवं अत्यन्त सुकुमार हैं। [1]

जिनके चरणों के नूपुरों की मधुर झंकार से कोटि ब्रह्म के अवतार प्रकट होते हैं, वही श्रीराधा रास और निकुंज-विहारिणी हैं, जिनकी महिमा अपरंपार है।  [2]

श्री राधा नित्य नवीन निकुंज की नवनिधि हैं, जो नित्य विहार में रमण करती रहती हैं। श्री हित गोपाल जी कहते हैं — ऐसी नवलप्रिया श्रीराधा पर मैं बारम्बार न्योंछावर हूँ। [3]