(राग सारंग, तिताला)
हमारी बृंदावन रजधानी।
निधि बन महाराज ब्रजराज लाड़िलो, श्रीराधा पटरानी॥ [1]
निधि बन सेवा कुंज पुलिन, बंसीवट सुख-दानी।
ब्रजनिधि ब्रजरस सौं मन अटक्यौ, निधि पाई मनमानी॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि मुक्तावलि (9)
श्री वृन्दावन समस्त तीर्थों का शिरोमणि, रसिकों की राजधानी है, जहाँ निधिवन के अधिपति, ब्रजराज लाड़िले श्रीकृष्ण नित्य विराजमान हैं, और श्री राधा रानी उनकी परमस्नेहवती पटरानी रूप में विराजमान हैं। [1]
वृन्दावन में स्थित निधिवन, सेवाकुंज, यमुना पुलिन, वंशीवट आदि जीवों को अद्भुत सुख प्रदान करने वाले लीला-स्थल हैं। श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं, मेरा मन ब्रजरस में अटक गया है, जिससे मैंने अपनी मनभायी अभिलषित निधि को प्राप्त कर लिया है। [2]
वृन्दावन में स्थित निधिवन, सेवाकुंज, यमुना पुलिन, वंशीवट आदि जीवों को अद्भुत सुख प्रदान करने वाले लीला-स्थल हैं। श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं, मेरा मन ब्रजरस में अटक गया है, जिससे मैंने अपनी मनभायी अभिलषित निधि को प्राप्त कर लिया है। [2]

