(राग मल्हार व किन्नरी)
झूलत ये दोऊ रूप अपार।
भानु किशोरी गोरी भोरी, छवि निधि नन्द कुमार॥ [1]
घन दामिनि दीनें गलबाहीं, छिन-छिन बाढ़त प्यार।
ललित लड़ैती या सुख ऊपर, सरबस दीजै वार॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, वन कुंजन झूलन लीला (25)
असीम रूप-सौंदर्य वाले श्री श्याम-श्यामा दोनों झूला झूल रहे हैं। वृषभानु सुता श्री राधा गोरी अत्यंत भोली हैं, और नंदकुमार अनुपम छवि के भंडार हैं। [1]
श्रीकृष्ण काले मेघ के समान श्यामवर्ण हैं, और श्रीराधा विद्युत-लता सी दमिनी स्वरूपा हैं। वे परस्पर गलबहियाँ डाले हुए हैं, और क्षण-क्षण उनका प्रेम बढ़ता जाता है। श्री ललित लड़ैती जी कहते हैं — यह झूलन-लीला रस इतना विलक्षण है कि उस पर अपना सब कुछ अर्पित कर देना चाहिए। [2]

