सुख की दंपति राशिहैं, तिनसो प्रेम बढाव।
‘सरसमाधुरी’ टहल को, नित प्रति रख चितचाव॥
‘सरसमाधुरी’ टहल को, नित प्रति रख चितचाव॥
- श्री सरस माधुरी
दिव्य दम्पति श्री राधा-कृष्ण आनंद की अपार निधि हैं, इसलिए उनके प्रति अपना प्रेम सतत बढ़ाते रहो। श्री सरस माधुरी कहते हैं कि निष्काम भाव से उनकी महल-टहल (सेवा) में अपने मन की रुचि और चाव को हर समय बनाए रखो।

