सुनीहूँ न देखी ऐसी जोरि जुगल किसोर किसोरि - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (56)

सुनीहूँ न देखी ऐसी जोरि जुगल किसोर किसोरि - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (56)

(दोहा)
अंग अंग सोभा जु पर, वारौं काम करोरि।
सुनी न हूँ देखी कहूँ, ऐसी अद्भुत जोरि॥

(पद)
सुनीहूँ न देखी ऐसी जोरि जुगल किसोर किसोरि।
अंग अंग सोभा पर सजनी वारौं काम करोरि॥ [1]
नहिं उपमा पटतर दीबे कों देखि थकी मति मोरि।
श्रीहरिप्रिया अद्भुत कलावलि मानहु काढ़ी कोरि॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (56)

(दोहा)
इन दोनों के अंग-प्रत्यंगों की शोभा पर करोड़ों कामदेवों को न्योछावर कर देना चाहिए। ऐसी अद्भुत युगल-जोड़ी (राधा-कृष्ण) न तो कभी सुनी गई है, न ही कहीं देखी गई है।

(पद)
युगल किशोर की जैसी यह जोड़ी है ऐसी न तो कहीं सुनी न ही कहीं देखी। इनके अंग प्रत्यंगों की शोभा पर करोड़ों कामदेवों को न्यौछावर करके वार डालना दीजिये। [1]

इनकी अद्वितीय सुंदरता की उपमा ढूँढ़ते ढूँढ़ते मेरी बुद्धि थकित हो गई। मैं बलिहारी जाऊं, श्रीहरि एवं प्रिया में कोक कलाओं की निपुणता अत्यंत विलक्षण हैं। किसने ये कलाएं प्रकट की हैं, मैं आश्चर्य चकित हूँ। [2]