श्रीबिहारीदास ब्रज में बसत, मिले सपरसी स्याँम ।
परस न पावै प्रेम बिनु, अपरस दुखी सकाँम ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (365)
प्रेमधाम श्रीब्रजमंडल में बसने से हमें वे श्री बाँकेबिहारीजी महाराज प्राप्त हुए हैं, जो एक मात्र प्रेमी भक्तों से प्रेम के कारण ही सपरस (स्पर्श/आलिंगन) करते हैं। प्रेम-विहीन बाह्य अपरस-सपरस के विचारों में उलझे रहने वाले सकामी जनों से तो वे सदा काल दूर रहते हैं, इसलिए वे लोग सदा दुखी बने रहते हैं।
परस न पावै प्रेम बिनु, अपरस दुखी सकाँम ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (365)
प्रेमधाम श्रीब्रजमंडल में बसने से हमें वे श्री बाँकेबिहारीजी महाराज प्राप्त हुए हैं, जो एक मात्र प्रेमी भक्तों से प्रेम के कारण ही सपरस (स्पर्श/आलिंगन) करते हैं। प्रेम-विहीन बाह्य अपरस-सपरस के विचारों में उलझे रहने वाले सकामी जनों से तो वे सदा काल दूर रहते हैं, इसलिए वे लोग सदा दुखी बने रहते हैं।

