(राग बिलावल)
स्यामा चलहु, लड़ैती प्रिया,
कुंजनि करहु, केलि ।
स्याम-तमाल-लाल नवलकिसोरी
बाल तुम जु नवल नव कनक-बेलि ॥ [1]
बिविध कुसुम-घन-रचित श्रीवृन्दावन,
बोलत सुहाये पिक-मधुप रहे झेलि ।
श्रीबीठलविपुल रस बिहारी तिहारे बस,
जमुना के तीर सुख बिसद बिलास खेलि ॥ [2]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (11)
श्रीविपुलबिहारिनदासीजी निज प्राण-लालसा को प्रकट करती हुई अपनी प्राण-सखी श्री राधा से निवेदन करने लगीं - हे श्यामा प्यारी ! निकुंज-भवन पधार कर केलि-रंग में अनुरंजित हों, आपको इस रस में लाड़ लड़ाने के लिए हमारे तन-मन-प्राण आकुल-व्याकुल हो रहे हैं। हे नव किशोरी बाला! श्याम तमाल लाल के साथ नव-कनक वेलि के रूप में आलिंगनबद्ध हों। [1]
विविध सौरभयुक्त पुष्पों से सुशोभित श्रीवृंदावन हो रहा है, जहाँ कोकिल पंचम स्वर में गा रही हैं एवं भ्रमर गुंजार कर रहे हैं। श्रीयमुना जी के तट पर प्रेमरसवर्ती प्रियतम आपके वशीभूत हैं, अत: उनके संग रस–विलास क्रीड़ा का विस्तार करें। [2]
स्यामा चलहु, लड़ैती प्रिया,
कुंजनि करहु, केलि ।
स्याम-तमाल-लाल नवलकिसोरी
बाल तुम जु नवल नव कनक-बेलि ॥ [1]
बिविध कुसुम-घन-रचित श्रीवृन्दावन,
बोलत सुहाये पिक-मधुप रहे झेलि ।
श्रीबीठलविपुल रस बिहारी तिहारे बस,
जमुना के तीर सुख बिसद बिलास खेलि ॥ [2]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (11)
श्रीविपुलबिहारिनदासीजी निज प्राण-लालसा को प्रकट करती हुई अपनी प्राण-सखी श्री राधा से निवेदन करने लगीं - हे श्यामा प्यारी ! निकुंज-भवन पधार कर केलि-रंग में अनुरंजित हों, आपको इस रस में लाड़ लड़ाने के लिए हमारे तन-मन-प्राण आकुल-व्याकुल हो रहे हैं। हे नव किशोरी बाला! श्याम तमाल लाल के साथ नव-कनक वेलि के रूप में आलिंगनबद्ध हों। [1]
विविध सौरभयुक्त पुष्पों से सुशोभित श्रीवृंदावन हो रहा है, जहाँ कोकिल पंचम स्वर में गा रही हैं एवं भ्रमर गुंजार कर रहे हैं। श्रीयमुना जी के तट पर प्रेमरसवर्ती प्रियतम आपके वशीभूत हैं, अत: उनके संग रस–विलास क्रीड़ा का विस्तार करें। [2]

