जयति जय जयति ललितादि वर भामिनी॥
त्राहि बलिकृपा करि खबरि करि दीजिये,
धरो पद कमल मम शीश में स्वामिनी॥ [1]
तुमहि तजि कौन सूं करूं विनती अहो मिलै,
कछु टहल मोहि गुनन अभिरामिनी॥ [2]
सुजसवर आपको सकल लोकन विदित,
करति तुम कहो श्री राधिका भामिनी॥ [3]
रामसखी दीन जलहीन ज्यों मीन है,
वेगिकरुणा करो करुणारस गामिनी॥ [4]
- श्री रामसखीजी महाराज, श्री भक्तिरस मंजरी
जय हो ललितादिक सखियों में श्रेष्ठ, सखियों की चूड़ामणि श्री राधा महारानी की। हे स्वामिनी! मुझ पर अनुग्रह कर मेरी सुध लें और कृपापूर्वक अपने चरणकमलों को मेरे मस्तक पर सुशोभित कराएं। [1]
हे गुणसम्पन्न स्वामिनी! मैं आपको छोड़कर और किसके आगे विनती रखूं? मुझे भी आपके महल में सेवा करने का सौभाग्य प्रदान कीजिए। [2]
आपका मधुर यश सम्पूर्ण लोकों में व्याप्त है। कृपया आप ही बताएं कि मैं आपके लिए कौन-सी सेवा करूं, हे राधिका भामिनी! [3]
आपकी दीन सेविका रामसखी, जल के बिना मछली के समान व्याकुल है। कृपया शीघ्र अपनी करुणा की वर्षा करें। [4]
त्राहि बलिकृपा करि खबरि करि दीजिये,
धरो पद कमल मम शीश में स्वामिनी॥ [1]
तुमहि तजि कौन सूं करूं विनती अहो मिलै,
कछु टहल मोहि गुनन अभिरामिनी॥ [2]
सुजसवर आपको सकल लोकन विदित,
करति तुम कहो श्री राधिका भामिनी॥ [3]
रामसखी दीन जलहीन ज्यों मीन है,
वेगिकरुणा करो करुणारस गामिनी॥ [4]
- श्री रामसखीजी महाराज, श्री भक्तिरस मंजरी
जय हो ललितादिक सखियों में श्रेष्ठ, सखियों की चूड़ामणि श्री राधा महारानी की। हे स्वामिनी! मुझ पर अनुग्रह कर मेरी सुध लें और कृपापूर्वक अपने चरणकमलों को मेरे मस्तक पर सुशोभित कराएं। [1]
हे गुणसम्पन्न स्वामिनी! मैं आपको छोड़कर और किसके आगे विनती रखूं? मुझे भी आपके महल में सेवा करने का सौभाग्य प्रदान कीजिए। [2]
आपका मधुर यश सम्पूर्ण लोकों में व्याप्त है। कृपया आप ही बताएं कि मैं आपके लिए कौन-सी सेवा करूं, हे राधिका भामिनी! [3]
आपकी दीन सेविका रामसखी, जल के बिना मछली के समान व्याकुल है। कृपया शीघ्र अपनी करुणा की वर्षा करें। [4]

