जाके अगनित गुनन को गावत वेद ऋचान - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (94)

जाके अगनित गुनन को गावत वेद ऋचान - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (94)

जाके अगनित गुनन को, गावत वेद ऋचान।
दारी के, गारी सुनन, सोइ छेड़त सखियान ॥

- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (94)

जिन श्री कृष्ण के अनगिनत गुणों को गाते हुये चारों वेद नहीं थकते, वही ब्रह्म श्री कृष्ण ब्रज में गोपियों को हठात् छेड़ कर 'दारी के’, इत्यादि गाली को सुनने में अपना परम सौभाग्य समझते हैं।