(राग मारू)
ब्रज में होत कुलाहल भारी।
आनन्द मगन ग्वाल सब नाचत,
देत परस्पर तारी ॥ [1]
नन्दराय के भवन में आवत,
आनंदित ब्रजनारी ।
पुत्र जनम सुनि हर्ष भयौ है,
'परमानन्द' बलिहारी ॥ [2]
- श्री परमानन्द दास जी
श्रीकृष्ण जन्म के कारण ब्रज मण्डल में अतिशय कोलाहल हो रहा है । सभी ग्वाले आनन्द मग्न होकर परस्पर ताली बजाते हुए नाच रहे हैं। [1]
नन्द जी के घर में ब्रज की नारियाँ आनंदित होकर आ रही हैं । श्री परमानन्द दास जी कहते हैं कि श्रीकृष्ण के जन्म के शुभ समाचार से उन्हें अत्यंत हर्ष हुआ है और वे उन पर बलिहारी जा रही हैं । [2]
ब्रज में होत कुलाहल भारी।
आनन्द मगन ग्वाल सब नाचत,
देत परस्पर तारी ॥ [1]
नन्दराय के भवन में आवत,
आनंदित ब्रजनारी ।
पुत्र जनम सुनि हर्ष भयौ है,
'परमानन्द' बलिहारी ॥ [2]
- श्री परमानन्द दास जी
श्रीकृष्ण जन्म के कारण ब्रज मण्डल में अतिशय कोलाहल हो रहा है । सभी ग्वाले आनन्द मग्न होकर परस्पर ताली बजाते हुए नाच रहे हैं। [1]
नन्द जी के घर में ब्रज की नारियाँ आनंदित होकर आ रही हैं । श्री परमानन्द दास जी कहते हैं कि श्रीकृष्ण के जन्म के शुभ समाचार से उन्हें अत्यंत हर्ष हुआ है और वे उन पर बलिहारी जा रही हैं । [2]

