ऊधो सूधो है गयौ, सुनि गोपिन के बोल।
ज्ञान बजाई डुगडुगी, प्रेम बजायो ढोल॥
- ब्रज के दोहे
उद्धव ब्रज में गोपियों को ज्ञान का उपदेश देने आए थे, परंतु गोपियों की प्रेममयी वार्ता को सुनकर वे सीधे (प्रेम मार्गी) हो गए । वे तो ज्ञान की डुगडुगी बजाने आए थे, पर यहाँ ब्रज में तो हर तरफ़ प्रेम का ढोल ही गूँज रहा था।
ज्ञान बजाई डुगडुगी, प्रेम बजायो ढोल॥
- ब्रज के दोहे
उद्धव ब्रज में गोपियों को ज्ञान का उपदेश देने आए थे, परंतु गोपियों की प्रेममयी वार्ता को सुनकर वे सीधे (प्रेम मार्गी) हो गए । वे तो ज्ञान की डुगडुगी बजाने आए थे, पर यहाँ ब्रज में तो हर तरफ़ प्रेम का ढोल ही गूँज रहा था।

