बसतहि वृन्दाविपिन में, अंतर करै जु कोइ ।
तिनकौं रिपु बड़ जानियौं, ताकौ मुख जिन जोइ ॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.49)
जो व्यक्ति श्री वृन्दावन वास में बाधा उत्पन्न करे, उसे अपना परम शत्रु मानना चाहिए और उसका मुख भी नहीं निहारना चाहिए।
तिनकौं रिपु बड़ जानियौं, ताकौ मुख जिन जोइ ॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.49)
जो व्यक्ति श्री वृन्दावन वास में बाधा उत्पन्न करे, उसे अपना परम शत्रु मानना चाहिए और उसका मुख भी नहीं निहारना चाहिए।

