मान बडाई ईर्षा हरष शोक दुखदाय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (3)

मान बडाई ईर्षा हरष शोक दुखदाय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (3)

मान बडाई ईर्षा, हरष शोक दुखदाय।
चतुर शिरोमनि लाडिली, इन सों लेउ बचाय ॥

- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (3)

हे चतुराई की शिरोमणि, लाडिली श्रीराधे! अभिमान, प्रशंसा, ईर्ष्या और सांसारिक हर्ष-शोक आदि केवल दुखदायी हैं। कृपा कर मुझे इन सब दोषों से बचाकर, अपने चरणकमलों की भक्ति में सदैव लगाए रखो।