(राग गौड सारंग)
शरण श्री वृंदावन की जइये ।
युगल बिहारी चरण कमल सों, निश दिन नेह लगइये ॥ [1]
सेवा कुंज समीप बैठके, दम्पति ध्यान समइये ।
होय भावना सिद्ध सहज ही, निरखि नयन हुलसइये ॥ [2]
लेले सीत रसिक संतन की, बाधा भूख भगइये ।
शीतल सुंदर जल यमुनाको, पी पी प्यास मिटइये ॥ [3]
राधे श्याम नाम रट रसना, आँसू दृगन बहइये ।
सरसमाधुरी पिय प्यारी के, प्रेम पुलक गुण गइये ॥ [4]
- श्री सरस माधुरी
श्री वृंदावन की शरण ग्रहण कीजिए। युगल बिहारी (श्री राधा-कृष्ण) के चरणकमलों से दिन-रात प्रेम कीजिए। [1]
सेवाकुंज के समीप बैठकर श्री युगल सरकार का ध्यान करो, जहाँ सहज ही भाव सिद्ध हो जाता है। नेत्रों से उनके दर्शन पाकर मन उल्लासित हो उठता है। [2]
रसिक संतों की जूठन पाकर अपनी भूख की बाधा शांत करो, और श्री यमुनाजी का शीतल, सुन्दर जल पीकर अपनी प्यास बुझाओ। [3]
मुख से राधे-श्याम नाम रटते हुए, नेत्रों से प्रेमाश्रु बहाइए। श्री सरस माधुरी कहते हैं कि युगल सरकार के प्रेम-रस में डूबकर, पुलकित होकर उनके गुणों का गान करो। [4]
शरण श्री वृंदावन की जइये ।
युगल बिहारी चरण कमल सों, निश दिन नेह लगइये ॥ [1]
सेवा कुंज समीप बैठके, दम्पति ध्यान समइये ।
होय भावना सिद्ध सहज ही, निरखि नयन हुलसइये ॥ [2]
लेले सीत रसिक संतन की, बाधा भूख भगइये ।
शीतल सुंदर जल यमुनाको, पी पी प्यास मिटइये ॥ [3]
राधे श्याम नाम रट रसना, आँसू दृगन बहइये ।
सरसमाधुरी पिय प्यारी के, प्रेम पुलक गुण गइये ॥ [4]
- श्री सरस माधुरी
श्री वृंदावन की शरण ग्रहण कीजिए। युगल बिहारी (श्री राधा-कृष्ण) के चरणकमलों से दिन-रात प्रेम कीजिए। [1]
सेवाकुंज के समीप बैठकर श्री युगल सरकार का ध्यान करो, जहाँ सहज ही भाव सिद्ध हो जाता है। नेत्रों से उनके दर्शन पाकर मन उल्लासित हो उठता है। [2]
रसिक संतों की जूठन पाकर अपनी भूख की बाधा शांत करो, और श्री यमुनाजी का शीतल, सुन्दर जल पीकर अपनी प्यास बुझाओ। [3]
मुख से राधे-श्याम नाम रटते हुए, नेत्रों से प्रेमाश्रु बहाइए। श्री सरस माधुरी कहते हैं कि युगल सरकार के प्रेम-रस में डूबकर, पुलकित होकर उनके गुणों का गान करो। [4]

