साधु संग में सुख बड़ो, जो करि जानै कोय - श्री दयाबाई

साधु संग में सुख बड़ो, जो करि जानै कोय - श्री दयाबाई

साधु संग में सुख बड़ो, जो करि जानै कोय।
आधो छिन सत्संग को, कलमख डारै खोय॥

- श्री दयाबाई

दयाबाई कहती हैं कि जो वास्तव में साधु-संग करता है, वही जानता है कि इसमें अपार सुख है। यह इतना दुर्लभ है कि आधा क्षण भी संतों की संगति में बिताने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।