सबहीं भूमि गोपाल की, या में अटक कहा।
जा के मन में अटक है, सोई अटक रहा॥
- ताज़ बेगम (ताज़ बीबी)
समस्त संसार ही भगवान श्रीकृष्ण का है, इसके कण-कण में वे समाए हुए हैं। यह संसार किसी को बाधा नहीं पहुँचाता। वास्तव में जीव का अपना ही मन राग एवं द्वेष रूपी विकारों में अटका (फँसा) होता है। यदि मन को भगवान के भजन में लगा दिया जाए, तो इसकी समस्त अटकन सदा-सदा के लिए समाप्त हो जाए और वह जीव परम निर्भयता को प्राप्त कर ले।
जा के मन में अटक है, सोई अटक रहा॥
- ताज़ बेगम (ताज़ बीबी)
समस्त संसार ही भगवान श्रीकृष्ण का है, इसके कण-कण में वे समाए हुए हैं। यह संसार किसी को बाधा नहीं पहुँचाता। वास्तव में जीव का अपना ही मन राग एवं द्वेष रूपी विकारों में अटका (फँसा) होता है। यदि मन को भगवान के भजन में लगा दिया जाए, तो इसकी समस्त अटकन सदा-सदा के लिए समाप्त हो जाए और वह जीव परम निर्भयता को प्राप्त कर ले।

